Zulf Shayari

ज़ुल्फ शायरी – Zulf Shayari in Hindi

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जुल्फों में तेरी पेंच ओ ख़म जितने,
मेरी मजबूरियाँ मेरे मुश्किलात बस इतने.

अच्छी लगती नही चांद पे बदलियां,
अपने चेहरे से जुल्फें हटा लीजिये ।

रुख-ए-यार पे यह जुल्फें,
यूँ फिसल रही है,
कभी दिन निकल रहा है,
कभी रात ढल रही है।

यूं ज़ुल्फें खोल कर न रखा कर मेरी जान,
उलझ सा जाता हूँ इनमें जब भी देखता हूँ.

इजाजत हो तो मैं
तस्दीक कर लूँ तेरी जुल्फों से,
सुना है जिन्दगी इक
खूबसूरत जाम है साकी।”अदम”

मुझे पसंद है उसकी खुली ज़ुल्फ़ों के साये,
उनकी उलझी ज़ुल्फ़ों में उलझा रहना चाहता हूँ.

तेरी खुली~खुली सी ज़ुल्फ़ें,
इन्हें लाख तुम संवारो अगर हम
संवारते तो,कुछ और बात होती।

हवा के झोके जुल्फों को बिखरा देंगे,
इन्हें देखकर हम दुनिया भुला देंगे.

बिखरी हुई थी जुल्फे वही आँखोमें नमी थी,
हम चाहकर भी पूरी ना कर सके,
ऐ-जिंदगी तूझमें ऐसी क्या कमी थी।

मैं घंटों निगाह भर
के देखता रहा उन्हें,
वो इत्मिनान से घंटों
धूप में जुल्फें सुखाती रहीं।