Zulm Shayari ज़ुल्म शायरी हिंदी में (2022-23)

Zulm Shayari In Hindi | ज़ुल्म शायरी हिंदी में

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Zulm Shayari ज़ुल्म शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Zulm Shayari

जुल्म करता हूँ जुल्म सहता हूँ
मैं कभी चैन से रहा ही नहीं

जुल्म फिर जुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
खून फिर खून है टपकेगा तो जम जाएगा

Zulm Shayari ज़ुल्म शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

दिल नज्र करो जुल्म सहो नाज उठाओ
ऐ अहल ए तमन्ना ये हैं अरकान ए तमन्ना

Zulm Shayari ज़ुल्म शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

दो चार दिन के जुल्म नहीं हैं यजीद के
पीते हैं लोग आज भी पानी खरीद के

अहल ए जुनूँ पे जुल्म है पाबंदी ए रुसूम
जादा हमारे वास्ते काँटा है राह का

असीरान ए कफस पर जुल्म तो सय्याद करते हैं
कि उन के पर कतर लेते हैं तब आजाद करते हैं

नावक ए जुल्म उठा दशना ए अंदोह सँभाल
लुत्फ के खंजर ए बे नाम से मत मार मुझे

ऐ अश्क न कर जुल्म जरा देर ठहर जा
इक शख्स अभी मेरी निगाहों में बसा है

जुल्म कब तक कीजिएगा इस दिल ए नाशाद पर
अब तो इस बंदे पे टुक कीजे करम बंदा नवाज

वहाँ की रौशनियों ने भी जुल्म ढाए बहुत
मैं उस गली में अकेला था और साए बहुत

जाने क्या क्या जुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया ख्वानी होती है

तुम इस कदर जो निडर हो के जुल्म करते हो
बुताँ हमारा तुम्हारा कोई खुदा भी है

पर्दा ए लुत्फ में ये जुल्म ओ सितम क्या कहिए
हाए जालिम तिरा अंदाज ए करम क्या कहिए

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